एक नायिका का नायक प्रकृति का कोना-कोना एक सामान ही है बस लोगो का उस को देखने का नजरिया बदल जाता है जो किसी को लेखक तो किसी को कुछ और बनाता है। इसी तरह सभी नर-नारी भी एक ही सामान है चाहे दुनिया के किसी कोने में चले जाओ बस देखने का ये नजरिया जो है न वही उन्हें अलग-अलग रूप प्रदान करता है। बाबा धुआँधर के शब्द मेरे कानों के पर्दो को झकझोर रहे थे सत्य क्या है क्या यही सत्य है। तो 'ऐज युसुअल' मैंने मुँह में एक पान का बीड़ा दबा लिया और रंगत घुलते ही पुचाक से थूक कर अपने रिक्शे वाले से कहा चलो भाई अब रिक्शा आगे बढ़ाओ चाहो तो तुम भी पान का एक बीड़ा खा सकते हो तो उसने कहा "बाऊजी नशा बुरी चीज है।" मैंने कहा फिर क्या तब रिक्शा आगे बढ़ाओ या कोई मुहर्त निकलवाना पड़ेगा ? मन फिर भी असमंजस में था धुआँधार बाबा के शब्द जो तेज होती सड़क की चहल-पहल में भी कानो को अब तक झकझोर रहे थे ऐसे थे कि मानो जाने का नाम ही नहीं ले रहे थे। कुछ न समझ पाने की स्थिती में मैंने रिक्शे वाले से पुछा...