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आदत-लाइफ इस बीयूटीफुल इफ यू आर

आदत-लाइफ इस बीयूटीफुल इफ यू आर

उससे न मिल सकने पर भी उसकी कमी रहती ही थी, उसके नकारात्मक बातों को भी मैं मिस करने लगी।
उसकी मुझे आदत सी पड़ चुकि थी और जैसे हम बुरी आदतों मसलन शराब की ही, सिगरेट की भी कहां आसानी से छोड़ पाते है , मेरी दोस्त भी मेरे लिए उसी श्रेणी की आदत बन गयी थी।

मैं उसे इस लिए भी याद करने लगी क्योंकि उसकी मैं सलाहकार जो बन गयी थी, और हमारा-आपका; किसी का सलाहकार बन जाना हमारे लिए एक 'बैज ऑफ ऑनर' से कम नहीं होता फ़िर। बहुत ही महत्वपूर्ण अनुभव करते है हम क्योंकि किसी के जीवन मे तो महत्व्पूर्ण बन सकें है। 

ख़ैर आप सोच रहे होंगें के आखिर इस में मोटिवेशन या उत्साह-वर्धक क्या बात हुई। तो अब उसकी ही बात करूँगी।

लगभग जब साल भर भी उससे नहीं मिली तो उसके जन्मदिन पर खुद ही मैन मिलने का बहाना ढूंढकर उसको फ़ोन लगाया और ये क्या हमेशा ही घर के नीरस से बनाये हुए वातावरण में अपना जन्मदिन मनाने वाली मेरी दोस्त ने मुझे बाहर एक अच्छे से रेस्तरां में बुलाया। मैं अब उससे और उत्साह और विस्मय से मिलने पहुँची। ये क्या उसने अपने बालों को एक बहुत ही सुंदर हेयर स्टाइल दिया था, जीन्स के साथ कुर्ता तो वह पहना ही करती थी पर आज उसने जो टॉप चुना था उसपर लिखा था, 'लाइफ इस बीयूटीफुल इफ यू आर'। ज़िन्दगी सुंदर है यदि आप सुंदर है। अब मैं रोक न सकी खुदको और पूछा के रूपा ये सब कैसे, सब ठीक हो गया, पति ने आदतें बदल ली, सास का क्या हाल है। 

उसने कहा सब वैसा ही है लगभग लेक़िन मैंने ख़ुद को बदल लिया है। यानि अपनी आँखें ठीक करली है,और मन दुरुस्त करलिया है और सच कहूँ तो अब उन सबका व्यवहार भी बदलता हुआ लगता है। मैंने पूछा तूने ख़ुद को बदला कैसे। रूपा ने कहा ख़ुद से। और मेरी पसंद का खाना आर्डर करने लगी। 

उससे बातें करके आज सब कुच्छ कितना अच्छा लग रहा था। जैसे बरसात आने पर घूप में जला मन शीतल हो उठता है और अंदर तक़ एक स्फूर्ति दौड़ उठती है। आज मैं ऐसा ही महसूस कर रही थी। सिक्के के यही दो पहलू है शायद, कैसे नकारात्म, सकारात्मक हो गया बस नज़रिया बदल लेने भर से। 

हर परिस्थिति में सिक्के के सकारात्म ऊर्जावर्द्धक पहलू को चुन लेना चाहिए और ज़िन्दगी में आगे निकल जाना चाहिये। आल बिकॉज़,'लाइफ इस बीयूटीफुल इफ यू आर।'

आप से फ़िर मिलती हूँ, हँसते रहिये- याद करते रहिए।

- अदिति 

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